वो छोटी छोटी बातेँ और बडीसी मुस्कुराहटें
भूले नहीं भूलती वो बचपन की यादें
वो बारिश में भीगना और माँ का डाँटना
ढेरसारी आ...छी (छींके), और रात भर जागना
हल्कीसी ख़रोंच और दुनियाभरका ड्रामा
माँ की झप्पी और चॉकलेट का बहाना
गर्मी की छुट्टियाँ और दोपहर का शोर
बड़ो की नींद से हमें क्या सरोकार
गाँव में खुले छत पे बिताई हर वो रात
चमेली की खुशबू और समंदर का साथ
छतो पे खूब जमता लुकाछुपी का खेल
जमा किये चंद सिक्के और थोड़ी सुखी भेल
दिवाली में सुखाये हुए कुछ तेरे कुछ मेरे पटाखें
चुराकर जो जलाये वही जोरसे फुंटे
वो मिटटीके खिलौने और लकड़ी का झूला
हर सावन न जाने ले गया मेरी कितनी कागज की कश्तियाँ
वो छोटी छोटी बातेँ और बडीसी मुस्कुराहटें
भूले नहीं भूलती वो बचपन की यादें
-- मीता मेहेर
(११-०८-२०१८ )
