ये बारिश गीली गीलीसी,
हवा कभी तेज , कभी हलकी हलकीसी।
आंखो में एक कतरा,
थोडा गर्म ...थोडा बेहतासा।
बादलोंमें छुपा आसमान,
मन मे सर्द अंधेरा समायासा।
यादों की आधी-अधुरी गजल,
क्या दिल में कुछ दफनाया था ?
गलियारोंसे सरकता पानी,
कश्ती मेरी कहा रूकी ... मुडी... बेह गई।
ये बारिश गीली गीली सी ....
--मीता मेहेर
(१२-०६-२०१९)


