आज यूही आँख भर आयी
अधुरीसी साँस अटक गयी
कोशिश की .... बस एक आह निकली
ये बेबसी ....मुझे निगल गयी
सेहमी सेहमी सांसे
जैसे उधार कि हो
अनचाहे बोझ से
कुछ दबी सी हो
खामोश हो गयी
कुछ देर ...थम सी गयी
थक गयी ...रुक गयी
और कही हार गयी ....जिंदगी
ये बेबसी ....मुझे निगल गयी
---मीता मेहेर
(23-04-2021)