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कधी भेटलो , आणि कसे भेटलो ? |
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असे संदर्भ अंधुक झाले , तरी बोलण्यासारखं भरपूर असलं . |
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की मैत्री जुनी म्हणायची | ||
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अचानक फोन आल्यावर , चकार शब्द न बोलता , |
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शांतपणे फक्त ऐकून , आश्वासक हुंकार आले |
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की मैत्री जुनी म्हणायची |
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स्त्रीलिंगी
, पुलिंगी च्या भानगडीत न पडता, |
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हो ला हो आणि अरे ला का रे करणारं कुणी असलं , |
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की मैत्री जुनी म्हणायची |
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आपापल्या जगात गुरफ़टलेलं असताना |
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शेवटचं बोलणं कधी झालं , हे विसरलं , |
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तरी महत्वाच्या क्षणी , पटकन नाव सरकून गेलं, |
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की मैत्री जुनी म्हणायची |
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--मीता मेहेर
(02-08-2020)

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