और कानोसे गुजराती सर्द हवा , बेरूख , बेपर्वा
बीच से गुजरता एक रास्ता
अपनीही मंजिल को धुंडता
सोचा रास्ते के साथ चल दू
हो सके तो थोडा आसमान छू लू
सन्नाटे मे खो कर शायद खुद को पा लू
एक रास्ता जो वादियोंमे खो गया
दूसरा जो घर की ओर जा रहा
ठेहर गया मै , थम गयी मै
दिल और दिमाग के बिच हार गयी मै
— मीता मेहेर

No comments:
Post a Comment